Sep
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इसी तरह भगवान्ने नारदजीके मनकी बात नहीं होने दी तो उन्होंने
भगवान्को ही शाप दे दिया । छोटे बालक ही तो ठहरे ! काट गये । फिर भी माँ प्यार करती
है और थप्पड़ भी देती है तो प्यारभरे हाथसे देती है । माँ गुस्सा नहीं करती है कि काटता
क्यों है ! ऐसे ही पहले नारदजीने शाप तो दे दिया;
परंतु फिर पश्चात्ताप करके बोले‒‘प्रभु ! मेरा शाप व्यर्थ हो जाय । मेरी गलती हुई,
मुझे माफ कर दो ।’ भगवान्ने कहा‒‘मम इच्छा कह दीनदयाला’‒मेरी ऐसी ही इच्छा थी । भगवान् इस प्रकार कृपा करते हैं ।
पम्पा सरोवरपर भगवान्की वाणी सुनकर नारदजीको लगा कि भगवान् प्रसन्न
हैं । अभी मौका है । तब बोले कि ‘मुझे एक वर दीजिये ।’
भगवान् बोले‒‘कहो भाई ! क्या वरदान चाहते हो?’
नारदजीने कहा‒
राम सकल नामन्हते अधिका ।
होउ नाथ अध खग गन बधिका ॥
(मानस, अरण्यकाण्ड,
४२ । ८)
आपका जो नाम है, वह सब नामोंसे अधिक हो जाय और बधिकके समान पापरूपी पक्षियोंका
नाश करनेवाला हो जाय । भगवान्के हजारों नाम हैं,
उन नामोंकी गणना नहीं की जा सकती ।
‘हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता’ (मानस, बालकाण्ड
१४० । ५) भगवान् अनन्त
हैं, भगवान्की कथा अनन्त है तो भगवान्के नाम सान्त (सीमित) कैसे हो जायँगे ?
राम अनंत अनंत गुनानी ।
जन्म कर्म अनंत नामानी ॥
(मानस, उत्तरकाण्ड,
दोहा ५२ । ३)
विष्णुसहस्रनाममें आया है‒
यानि नामानि गौणानि विख्यातानि महात्मनः ।
भगवान्के गुण
आदिको लेकर कई नाम आये हैं । उनका जप किया जाय तो भगवान्के गुण,
प्रभाव, तत्त्व, लीला आदि याद आयेंगे । भगवान्के नामोंसे भगवान्के चरित्र याद
आते हैं । भगवान्के चरित्र अनन्त हैं । उन चरित्रोंको लेकर नाम भी अनन्त होंगे । गुणोंको
लेकर जो नाम हैं, वे भी अनन्त होंगे । अनन्त नामोंमें सबसे मुख्य ‘राम’ नाम है । वह खास भगवान्का ‘राम’ नाम हमें मिल गया तो समझना चाहिये कि बहुत बड़ा काम हो गया ।
शिव-पार्वतीका नाम-प्रेम
हरषे हेतु हेरि हर
ही को ।
किय भूषन तिय भूषन ती को ॥
(मानस, बालकाण्ड,
दोहा १९ । ७)
(शेष आगेके ब्लॉगमें)
‒‘मानसमें नाम-वन्दना’ पुस्तकसे |