Nov
28
(गत ब्लॉगसे आगेका)
एकान्तमें दो-तीन दिनतक वेश्या बैठी रही, फिर भी हरिदासजीका मन नहीं चला‒इसमें कारण क्या था ? ‘राम’ नामका जो रस है, वह भीतरमें आ गया । अब बाकी क्या रहा ! सज्जनो ! संसारके
रससे सर्वथा विमुख होकर जब भगवन्नाम-जपमें प्रेमपूर्वक लग जाओगे, तब यह भजनका रस स्वतः आने लगेगा । इसलिये ‘राम’ नाम रात-दिन लो, कितनी सीधी बात है !
नाम लेने का मजा जिसकी जुबाँ पर आ गया ।
वो जीवन्मुक्त हो गया चारों पदार्थ पा गया ॥
किसी व्यापारमें मुनाफा कब होता है ? जब वह बहुत सस्तेमें खरीदा जाय, फिर उसका भाव बहुत मँहगा हो
जाय, तब उसमें नफा होता है । मान लो, दो-तीन रुपये मनमें अनाज आपके पास लिया हुआ है और भाव चालीस, पैंतालीस रुपये मनका हो गया । लोग कहते हैं, अनाजका बाजार बड़ा बिगड़ गया, पर आपसे पूछा जाय तो आप क्या
कहेंगे ? आप कहेंगे कि मौज हो गयी । आपके लिये बाजार खराब नहीं हुआ ।
ऐसे ही ‘राम’ नाम लेनेमें सत्ययुगमें जितना
समय लगता था, उतना ही समय अब कलियुगमें लगता है । पूँजी उतनी ही खर्च होगी
और भाव होगा कलियुगके बाजारके अनुसार । कितना सस्ता मिलता है और कितना मुनाफा होता
है इसमें ! कलियुगमें नामकी महिमा विशेष है ।
भगवन्नाममें शक्ति
चहुँ जुग चहुँ श्रुति नाम प्रभाऊ ।
कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ ॥
नाम्नामकारि बहुधा निज सर्वशक्ति-
स्तत्रार्पिता नियमितः स्मरणे न कालः ॥
श्रीचैतन्य-महाप्रभुने कहा है कि नाममें भगवान्ने
अपनी सब-की-सब शक्ति रख दी । अनेक साधनोंमें जो शक्ति है, सामर्थ्य है, जिन साधनोंके करनेसे जीवका कल्याण होता है, कलियुगको देखकर भगवान्ने
भगवन्नाममें उन सब साधनोंकी शक्ति रख दी । जो अनेक साधनोंमें ताकत है, वह सब ताकत नाम महाराजमें है । इसे स्मरण करनेके लिये समयका
प्रतिबन्ध भी नहीं है । सुबह, दोपहर या रातमें, किसी समय जप करें । ‘ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य ही करें, दूसरे न करें, भाई लोग जप करें, माता-बहनें न करें’‒ऐसा कोई नियम नहीं है ।
(शेष आगेके ब्लॉगमें)
‒‘मानसमें नाम-वन्दना’ पुस्तकसे
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