Feb
27
(गत ब्लॉगसे आगेका)
श्रोता‒नामजप और सुमिरनमें क्या फर्क है ?
स्वामीजी‒नामजप जबानसे होता है और सुमिरन (स्मरण) मनसे होता है ।
श्रोता‒रामायण कहती है‒‘साधु ते होइ न कारज हानि’ (मानस, सुन्दर॰ ६ । २) । परन्तु मेरा अनुभव यह है कि सन्तोंने
ही मुझे लूटा है !
स्वामीजी‒वे सन्त हैं ही नहीं‒‘कालनेमि
जिमि रावन राहू’ (मानस, बाल॰ ७ । ३) ! कालनेमि सन्त था क्या
? रावण सन्त था क्या ? आपको कालनेमि,
रावण जैसे लोग मिले हैं, सन्त नहीं मिला है !
क्या रावण, कालनेमि मिलनेसे कल्याण हो जायगा ?
उनसे तो दुःख ही मिलेगा ! यह तो होगा ही !
यह न्याय है !
श्रोता‒आप कहते हो कि
मैं भगवान्का अंश हूँ और एक तरफ
कहते हो कि ‘वासुदेवः सर्वम्’ सब भगवान्के स्वरूप हैं, तो मुझे स्पष्ट
आज्ञा करो कि मैं कौन-सा मानूँ ? भगवान्का अंश
मानूँ या भगवत्स्वरूप मानूँ ?
स्वामीजी‒आपको प्यारा कौन-सा लगता है ?
मेरा बताया हुआ इतना काम नहीं करेगा, जितना आपको
प्यारा लगनेवाला काम करेगा ।
श्रोता‒भगवान्का अंश
अच्छा लगता है !
स्वामीजी‒बहुत अच्छा, यही मानो । हमारी सम्मति
भी यही है ।
श्रोता‒यहाँके सत्संगसे
मुझे बहुत लाभ होता है
। घरमें
ऐसा सत्संग कैसे मिले ? इसका उपाय
बतायें ।
स्वामीजी‒हमारी पुस्तकें पढ़ो । गीता ‘साधक-संजीवनी, परिशिष्ट-सहित’ सबसे मुख्य है ।
श्रोता‒ससुरालवाले दहेज माँगते हैं, इसलिये हमको लड़की पैदा करनेमें डर लगता है, जिससे गर्भपात करवाते हैं, तो दहेज लेनेवाले पापी हैं
कि हम पापी हैं ?
स्वामीजी‒दोनों ही पापी हैं ! पापी होनेमें कोई खर्चा
लगता है क्या ? हमारा वंश माँसे चला है । माँका दर्जा सबसे ऊँचा
है । छोटी-सी बच्ची भी मातृशक्ति है । उसका गर्भपात करना बड़ा
भारी पाप है ! लड़केका गर्भपात करनेकी अपेक्षा लड़कीका गर्भपात
करना ज्यादा पाप है ! कारण कि वह वंश पैदा करनेवाली मातृशक्ति
है । आप-हम सब माँसे पैदा हुए हैं, माँका
दूध पिया है, माँकी गोदीमें खेले हैं ! माँने खुद कष्ट पाकर हमारा पालन किया है ।
लोग समझते नहीं हैं ! दहेजके धनसे आप धनी हो जाओगे,
यह बात है ही नहीं । जो पैसा दूसरेको दुःख
देकर आया है, वह आपके घरके पैसेका
भी नाश करेगा !
अन्यायोपार्जितं द्रव्यं
दशवर्षाणि तिष्ठति ।
प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं
तद्विनश्यति ॥
(चाणक्यनीतिदर्पण
१५ । ६)
‘अन्यायसे उपार्जित धन दस वर्षतक ठहरता
है, पर ग्यारहवाँ
वर्ष आनेपर वह मूलसहित नष्ट हो जाता है ।’
(शेष आगेके ब्लॉगमें)
‒‘मैं नहीं, मेरा नहीं’ पुस्तकसे
|