।। श्रीहरिः ।।


आजकी शुभ तिथि–
वैशाख शुक्ल षष्ठी, वि.सं. २०७६ शुक्रवार
अमृत-बिन्दु
        



मेरा कुछ नहीं है, मुझे कुछ नहीं चाहिये और मुझे अपने लिये कुछ नहीं करना है–ये तीन बातें शीघ्र उद्धार करनेवाली हैं ।

 भगवान्‌का संकल्प हमारे कल्याणके लिये है । अगर हम अपना कोई संकल्प न रखें तो भगवान्‌के संकल्पके अनुसार अपने-आप हमारा कल्याण हो जायगा ।

 संसारका काम तो और कोई भी कर लेगा, पर अपने कल्याणका काम तो खुदको ही करना पड़ेगा; जैसे–भोजन और दवाई खुदको ही लेनी पड़ती है ।
        
अपने कल्याणके लिये किसी नयी परिस्थितिकी जरूरत नहीं है । प्राप्त परिस्थितिके सदुपयोगसे ही कल्याण हो सकता है ।

 कल्याण क्रियासे नहीं होता, प्रत्युत भाव और विवेकसे होता है ।
        
घरमें रहनेवाले सभी लोग अपनेको सेवक और दूसरोंको सेव्य समझें तो सबकी सेवा हो जायगी और सबका कल्याण हो जायगा ।
        
भोगोंकी प्रियता जन्म-मरण देनेवाली और भगवान्‌की प्रियता कल्याण करनेवाली है ।

 अपना कल्याण चाहनेवाला सच्‍चे हृदयसे प्रार्थना करे तो भगवान्‌के दरबारमें उसकी सुनवायी जल्दी होती है ।
        
किसीका भी कल्याण होता है तो उसके मूलमें किसी सन्तकी अथवा भगवान्‌की कृपा होती है ।

 संसारमें सन्त-महात्माओंकी, उपदेश देनेवालोंकी कमी नहीं है । परन्तु अपना कल्याण करनेमें खुदकी लगन, लालसा, मान्यता, श्रद्धा ही काम आती है ।