भगवान् प्राणिमात्रका आकर्षण कर रहे हैं‒उन्हें
खींच रहे हैं, इसीलिये उन्हें कृष्ण कहते हैं । प्राणी जिस अवस्था या परिस्थितिमें रहता है, उसमें भगवान्
उसे टिकने नहीं देते‒यही उनका खींचना है ! यह भगवान्का बुलावा है कि मेरे पास आओ
! गीतामें
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं‒ आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन । मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥ (८/१६) ‘हे अर्जुन ! ब्रह्मलोकपर्यन्त सब लोक
पुनरावर्ती अर्थात् जिनको प्राप्त होकर पीछे संसारमें आना पड़े, ऐसे हैं, परन्तु
हे कौन्तेय ! मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता ।’ तात्पर्य है कि भगवत्प्राप्तिके बिना मनुष्य कहीं भी टिकता
नहीं है और बारम्बार संसारमें ही घूमता रहता है । भगवान्को प्राप्त होनेपर ही
मनुष्य टिकता है । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ (गीता १५/६) ‘जहाँ जानेपर मनुष्य लौटकर नहीं आता, वह मेरा
परमधाम है ।’ आप चाहे कितनी भी शक्ति लगा लें, न तो शरीर सदा रहेगा और न
कुटुम्बी ही सदा रहेंगे । संसारकी कोई भी वस्तु आपके पास सदा नहीं रहेगी । कारण
यही है कि भगवान् निरन्तर आपको खींच रहे हैं । यह उनकी हमपर महान् कृपा है ! अतएव यदि आप संसारसे विमुख हो जाओगे तो भगवान्की प्राप्ति हो
जायेगी और आप सदाके लिये सुखी हो जाओगे । यदि संसारमें ही रचे-पचे रहे तो दुःखका
अन्त कभी आयेगा ही नहीं और नित्य नया-से-नया, तरह-तरहका दुःख मिलता ही रहेगा । यह बड़े
दुःखकी बात है कि लोग भगवान् और सन्त-महात्माओंसे भी सांसारिक सुख माँगते है ! दान-पुण्यादि करके भी बदलेमें महान् दुःखोंके जालरूप
संसारको खरीद लेते हैं । यह महान् कलंककी बात है ! गोस्वामी
तुलसीदासजी कहते हैं‒ एहि तन कर फल बिषय न भाई । स्वर्गऊ स्वल्प अन्त दुखदाई ॥ नर तनु पाइ
बिषयँ मन देहीं । पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं
॥ (मानस ७/४३/१)
मूर्ख लोग अमृतको देकर बदलेमें जहर ले लेते हैं ।
परमात्मप्राप्तिके लिये मिले हुए इस मनुष्य-शरीरमें नाशवान्
सांसारिक पदार्थोंकी माँगका रहना बड़ी लज्जाकी बात है । यदि आप कहें कि इस माँगके
बिना हमसे रहा नहीं जाता तो आप आर्त होकर भगवान्से प्रार्थना करें कि हे प्रभो !
यह भोग-पदार्थोंकी माँग हमसे मिटती नहीं है, अतएव आप ही इसे मिटा दें । यदि आपकी
यह प्रार्थना सच्ची होगी तो भगवान् अवश्य मिटा देंगे । परन्तु आप तो
भोग-पदार्थोंमें और उसकी माँगसे रस लेते हैं, उनमें प्रसन्न होते हैं; आपकी मिटानेकी इच्छा ही नहीं है, फिर माँग मिटे कैसे ? |

